Velentine day ( प्रेम दिवस)
प्रस्तावना - इस लेख में मैने " निस्वार्थ प्रेम " के ऊपर अपने विचार प्रस्तुत किए है। आशा है यह लेख आपको पसंद आएगा।
हरे कृष्णा दोस्तों,
फरवरी का महीना चल रहा है। और प्रेमियों का त्योहार velentine day भी नजदीक आ रहा है। और whats up group पर रोज hug day, kiss day, chocolate day और पता नहीं कौन-कौन से day के मैसेज एक दूसरे को फॉरवर्ड किए जा रहे हैं। ऐसा लग रहा है। मानो चारों ओर इस बनावटी प्रेम का तांडव मचा हुआ है। अब आप ही जरा ठंडे दिमाग से सोच कर बताइए की-
क्या प्रेम को जाहिर करने के लिए किसी स्पेशल डे की आवश्यकता है?
क्या प्रेम को जाहिर करने के लिए वस्तुओं के आदान-प्रदान की आवश्यकता है?
यदि आपका प्रेम सच्चा है। निस्वार्थ है। तो आपको इन आडंबरों की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। आपको अपना प्रेम जाहिर करने के लिए पूरे साल में किसी एक स्पेशल डे का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं।
आपका हर वह दिन हर वह पल स्पेशल होगा। जब आप अपने प्रेमी के साथ हैं। और आपके निस्वार्थ प्रेम के लिए वस्तुओं (teddy bear/gift) के आदान- प्रदान की आवश्यकता नहीं। जहां सिर्फ भावनाओं का आदान-प्रदान ही आपको तृप्त कर देगा। जहां सिर्फ प्रेम ही देने और प्रेम ही पाने की लालसा है।
जहां hug day और kiss day के नाम पर बाहों में जकड़ने और एक दूसरे के होठों चूमने जैसी अश्लील हरकतों की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। क्योंकि निस्वार्थ प्रेम में वासना के लिए कोई स्थान नहीं। जहां सिर्फ नजरे मिल जाए और उन्हीं में समा जाए। यदि ऐसा सात्विक और निस्वार्थ प्रेम आपके हृदय में पनपता है। तब सही मायने में आप प्रेम के वास्तविक रूप को जानते हैं।
वैलेंटाइन डे पर कितने ही लड़के लड़की एक दूसरे को "I Love you" बोलकर प्रपोज करते हैं। "I Love you" क्या वाकई में अंग्रेजी के यह तीन शब्द आपके अथाह प्रेम को जो आपके हृदय में हैं। उसे अभिव्यक्त करने की क्षमता रखते हैं? यह 3 शब्द तो क्या अंग्रेजी की पूरी vocabulary भी प्रेम को अभिव्यक्त करने में सक्षम नहीं है। अंग्रेजी ही क्या बल्कि दुनिया की किसी भी भाषा के जरिए आप सिर्फ प्रेम के कुछ भावों को ही व्यक्त कर सकते हैं। और कुछ के लिए तो शब्द ही नहीं बने। आप उन्हें सिर्फ महसूस कर सकते हो। अभिव्यक्त नहीं। क्योंकि सत्य तो यह है। कि प्रेम को पूर्ण रूप से अभिव्यक्त ही नहीं किया जा सकता।
"I love you" मतलब "मैं तुमसे प्यार करता हूं।" क्या वाकई में प्रेम किया जा सकता है? जो प्रेम किया जाता है। वह प्रेम नकली है। जिसे तुम असली समझ रहे हो। ठीक उन्हीं नकली प्लास्टिक के मोतियों की तरह जो फैक्ट्री में बनते हैं। जिस तरह सच्चा असली मोती तो समुद्र की गहराइयों में बारिश की बूंद से कुदरती रूप से सीप में स्वतः पैदा होता है। बनाया नहीं जाता। ठीक उसी प्रकार प्रेम भी किया नहीं जा सकता। वह कुदरती रूप से आपके हृदय की गहराइयों में स्वतः उत्पन्न होता है। जो प्रेम सुंदरता, वासना या किसी लालच के वशीभूत होकर किया जाता है। वह प्रेम कुछ महीनों या कुछ सालों बाद The end हो जाता है। और जो प्रेम निस्वार्थ भाव से स्वतः उत्पन्न हुआ। उसका कभी The end नहीं होता। वह आपके हृदय में सदा बसता है। भले ही किसी कारणवश आपने जिस से प्रेम किया। वह आपसे दूर हो गया हो। परंतु उसके प्रति प्रेम तो सदा आपके हृदय में रहेगा। आप चाहकर भी उस प्रेम को अपने हृदय और अपनी स्मृतियों से मिटा नहीं सकते।
बनावटी प्रेम आपकी रचना हो सकती हैं। जिसे आप अपनी मर्जी से पैदा भी कर सकते हैं। और अपनी मर्जी से मिटा भी सकते हैं। परंतु सच्चा प्रेम तो ईश्वर की रचना है। जो आपके ना चाहते हुए भी हो जाएगा। फिर वह प्रेम जात पात रंग भेद ऊंच नीच कुछ नहीं देखेगा। सिर्फ और सिर्फ प्रेम देखेगा। जो समाज के हर नियम और कायदे कानून से परे होगा। जो बदनामी से भी नहीं डरता। लोगों के पत्थर बरसाने पर भी जो प्रेम ख़त्म नहीं होता। वो प्रेम लैला मंजनू जैसे किरदार में अमर हो जाता है।
अब आप सोचिए ऐसा निस्वार्थ और सच्चा प्रेम जब सिर्फ एक व्यक्ति से होता है। तो इतिहास रच देता है। और जब यह निस्वार्थ प्रेम अपना दायरा फैलाएगा तो क्या होगा? फिर यह निस्वार्थ प्रेम करुणा में तब्दील हो जाएगा। फिर हमारे हृदय का यह प्रेम हर किसी के लिए होगा। प्रकृति के लिए होगा। जीवों के लिए होगा। हर मनुष्य के लिए होगा। फिर यह उच्च कोटि का प्रेम जिसके हृदय में होगा। वह गौतम बुद्ध, मदर टेरेसा, स्वामी विवेकानंद जैसे किरदार को जन्म देगा।
निस्वार्थ प्रेम, दया, करुणा क्षमा यह सारे भाव उन्हीं लोगों के हृदय में पनपते हैं। जिनके हृदय में स्वयं ईश्वर निवास करते हैं। इसलिए यह भाव पूजनीय हैं।
और जिनके हृदय में सिर्फ अहंकार द्वेष इर्ष्या का वास होता हैं। वहां ईश्वर वास नहीं करते।
यह निस्वार्थ प्रेम इतना पवित्र और पावन है। कि इसे समझाने के लिए स्वयं भगवान श्री कृष्ण को धरती पर अवतरित होना पड़ा।
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Velentine day क्या तुम्हारा प्यार "वेलेन्टाइन डे" तक ही सीमित है?
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दोस्तों जैसा कि मैंने अपने लेख में कहा कि दुनिया की कोई भाषा नहीं है। जो प्रेम को पूर्ण रूप से अभिव्यक्त कर सके। बस यही समस्या मुझे प्रेम को अभिव्यक्त करने में आ रही है। मेरे पास वह शब्दावली ही नहीं है और ना ही वह समझ। जो पूर्ण रूप से प्रेम के अर्थ को स्पष्ट कर सके। फिर भी मेरे पास जो भगवान का दिया थोड़ा बहुत ज्ञान है। उसके जरिए कोशिश कि हैं। कि आप प्रेम को थोड़ा सा तो समझ सके। यदि आपको मेरी यह कोशिश अच्छी लगी तो इस लेख को आगे भी share करे।
धन्यवाद।
राधे राधे
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