हरे कृष्णा दोस्तों,
दोस्तों, सुख और दुख हर मनुष्य के जीवन का हिस्सा है। कई बार यह दुख की घड़ी इतनी लंबी और कष्टदायक होती है। कि हमारा उससे बाहर निकलना असंभव सा लगने लगता है। दुख हमें चारों ओर से घेर लेता है। और आशा की कोई किरण नजर नहीं आती। हम पूरी तरह से अंदर से टूट चुके होते हैं। दुख की इस घड़ी में हमारे अपने भी हमारा साथ छोड़ देते हैं। निराशा और अवसाद से घिर हम खुद को भी असमर्थ महसूस करने लगते हैं। हमें कोई रास्ता नजर नहीं आता और ऐसे में कई बार आत्महत्या करने तक का विचार हमारे मन में आने लगता है।
दोस्तों यदि आप या आपका कोई मित्र या रिश्तेदार ऐसी किसी समस्या से जूझ रहे हैं। तो आप यह लेख अंत तक जरूर पढ़े। और जरूरतमंद व्यक्ति तक यह लेख अवश्य पहुंचाए। क्योंकि आज जो मैं आपको बताने जा रही हूं। यदि आप उसे ध्यानपूर्वक पढ़ते हैं। तो मैं यकीन के साथ कह सकती हूं। कि आपकी हर समस्या का समाधान आपको आज ही मिल जाएगा और आप इन दुख तकलीफों से बाहर आ जाएंगे। आपके जीवन में वह चमत्कार घटेगा। जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की।
दोस्तों, आज मैं आपको कोई काल्पनिक कहानी या यहां वहां से बटोरा हुआ ज्ञान नहीं दे रही हूं। बल्कि अपनी आपबीती बता रही हूं। और ईश्वर के साथ अपना वह अनुभव आपके साथ शेयर कर रही हूं। जिसके बाद से मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
दुख तकलीफ तो मैंने अपने बचपन से देखी। परंतु उन दुख तक़लिफों ने मुझे सिर्फ बाहरी रूप से ही प्रभावित किया। क्योंकि जब अपनों का साथ होता है। और सिर पर माता-पिता का हाथ होता है। तो हम बड़े से बड़े दुख से भी उबर जाते हैं। हुआ भी यही समय के साथ परिस्थितियां ठीक भी हो गई। सब कुछ अच्छा चलने लग गया। पर नहीं पता था। कि यह अच्छा समय अधिक समय के लिए नहीं है। नहीं पता था। कि जिंदगी फिर से करवट लेने वाली हैं। फिर से दुख तकलीफों का पहाड़ मेरे ऊपर टूटने वाला है। परंतु इस बार जो दुख मेरे जीवन में आए। उन्होंने सिर्फ बाहरी रूप से ही, मेरे जीवन में उथल-पुथल नहीं मचाई। अपितु मुझे अंदरूनी रूप से भी पूरी तरह तोड़ दिया। क्योंकि शादी के बाद मेरे अपनों ने भी मुझे पराया मान इस दुख की घड़ी में मेरा साथ छोड़ दिया। और जिनको मैंने अपना माना वो अपने भी मेरे विरुद्ध खड़े हो गए।
जीवन इस मोड़ पर आ गया। जहां जिंदगी भी जहन्नुम बन गई। जहां दिन का चैन सुकून और रातों की नींद तक छिन गई। दुख और अवसादों से घिर मैने 12 सालों तक नींद और डिप्रेशन की दवाइयां खाई। ना ही शारीरिक स्थिति अच्छी थी। ना ही मानसिक स्थिति और ना ही आर्थिक स्थिति। और ना ही रिश्तो में प्यार और सम्मान। अपनी जिंदगी के 14 साल बद से भी बदतर हालातों में निकालें। लाख कोशिशों के बाद ना आसपास के लोग बदले। ना माहौल बदला। और ना ही परिस्थितियां बदली। और एक समय बाद कोशिश करते करते मैं थक गई। अब लगने लगा। कि कुछ भी नहीं बदलने वाला। आशा की कोई किरण नजर नहीं आ रही थी। बार-बार आत्महत्या करने के विचार मन में आते। कि ऐसी जिंदगी से तो मौत ही अच्छी।
एक बार की बात है। नींद की गोली खाने पर भी जब मुझे नींद नहीं आ रही थी। तो में मोबाइल में नींद के उपाय देखने लगी। तब मुझे यूट्यूब पर संजीव मलिक जी की योग निद्रा की एक वीडियो मिली। मुझे काफी अच्छा लगा। और इस तरह मैं उनके चैनल से जुड़ी। उनकी meditation और positive affirmations वाली वीडियो भी देखी। और meditation वगैरह आदि शुरू किया। जिससे मुझे मेरी सेहत में भी काफी अच्छा रिजल्ट मिला। बाहर की परिस्थितियां तो नहीं बदली थी। परंतु मेरे मन की स्थिति काफी हद तक बदल गई थी। अब मुझे फर्क नहीं पड़ रहा था। कि मेरे आस-पास क्या घट रहा है। कौन मुझे ताना दे रहा है। कौन मेरे बारे में गलत बोल रहा है। मैंने अंदर से खुद को काफी मजबूत बना लिया। अब किसी का भी गलत व्यवहार मुझे दुखी नहीं कर पा रहा था। परिस्थितियां मेरे बस में नहीं थी। ना ही लोगों की सोच या व्यवहार। परंतु मेरा व्यवहार, मेरी सोच, मेरा व्यक्तित्व, मेरे कर्म, यह सब मेरे बस में थे। मैंने खुद पर बहुत काम किया अपनी सोच को बहुत सकारात्मक बनाया। करीब 1 साल में, मैं depression से बाहर आ गई। मेरी नींद की गोलियों की लत भी छूट गई।
परिस्थितियां नहीं बदली। परंतु मैं पूरी तरह बदल चुकी थी। इस बीच ईश्वर के प्रति मेरी श्रद्धा, मेरी आस्था और भी गहरी होती चली गई। ईश्वर के नाम के सहारे दुख की घड़ी भी हंसते हुए गुजार दी। इस विश्वास के साथ एक दिन सब ठीक हो जाएगा।
हालांकि मैंने खुद को पूरी तरह बदल लिया था। और हर हाल में खुश रहना सीख लिया था। फिर भी कहीं ना कहीं मन में यह चिंता सताती थी। की ऐसी परिस्थितियों में मुझे कब तक रहना पड़ेगा। आखिर यह परिस्थितियां कब और कैसे बदलेगी। और मुझे कोई रास्ता ना सूझता।
इसी बीच मैंने संजीव मलिक जी की एक वीडियो और देखी। जिसमें वे बता रहे थे। कि किस तरह समर्पण का रास्ता अपनाकर ईश्वर से जुड़ा जा सकता है। और जब हम ख़ुद को, ईश्वर के प्रति समर्पित करते हैं। तो हमारी सारी समस्याओं को वह सुलझा देता है।
और उन्होंने उस वीडियो में बताया कि किस तरह कृष्ण ने अर्जुन को समर्पण का रास्ता बताया।
गीता ज्ञान देते हुए श्री कृष्ण कहते हैं। जब कोई रास्ता ना दिखे। तो तू मेरी शरण में आ जाना। और खुद को अपनी सभी चिंताओं सहित मुझे समर्पित कर देना।
और मैने उस परमपिता परमात्मा से जुड़ने के लिए प्रेम और समर्पण का रास्ता अपनाया।
ईश्वर को खुद को समर्पित करने के बाद मेरी परिस्थितियां बदलने लगी। और मैं अपने जीवन की सभी चिंताओं से मुक्त हो गई। और जहां मुझे जीवन में कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा था। वह मुझे अपने जीवन का उद्देश्य समझ में आया और उस दिशा में, मैं अपना कार्य करने लगी।
आज मैं अपनी सभी समस्याओं के हल सीधा परमात्मा से पाती हूं। अपने जीवन का हर बड़ा फैसला उनके मार्गदर्शन में ही करती हूं। इसे ईश्वर का चमत्कार नहीं तो और क्या कहेंगे? जो कुछ समय पहले खुद अंधेरे में थी। depression में थी। नींद की गोलियां खा रही थी। जिंदगी से निराश थी। जिसे कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा था। जो अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी। हार चुकी थी। आज वहीं लोगों के जीवन में एक उम्मीद की किरण जगा रही है। लोगों को motivation दे रही है।
दोस्तों यदि आप जानना चाहते हैं। कि ईश्वर के प्रति समर्पण कैसे करें? ईश्वर, एंजल्स, आपके इष्ट, देवी देवता या आप जिसे भी मानते हैं। उनसे कैसे कनेक्ट करें? अपनी सभी समस्याओं का हल उनसे कैसे पाएं? तो आप comment box में लिखकर जरूर बताएं। इसके लिए मैं अलग से post डाल दूंगी।
दोस्तों यदि आपको मेरी यह post अच्छी लगी। तो आप इसे आगे भी शेयर करें। दोस्तों मेरे काम को सरहाने के लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया। आशा करती हूं। आपका और हमारा यह स्नेह पूर्ण संबन्ध सदा बना रहेगा। नीचे दी गई red line पर touch करके आप मुझे youtube, Instagram page और facebook page पर भी follow कर सकते हैं।
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धन्यवाद्।
राधे राधे।


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