प्रस्तावना - दोस्तों "सफलता के मूलमंत्र" कि इस कड़ी में आज हम बात कर रहे हैं। कि किस तरह हम अपनी प्रतिभा के दम पर सफलता को हासिल कर सकते हैं। और किस तरह हम अपने अंदर छुपी हुई प्रतिभा को बाहर ला सकते हैं। और किस तरह अपने talent के बल पर कुछ बड़ा achieve कर सकते।
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| Success mantra |
स्वयं का मंथन करें =
जी हां यदि आप सफल होना चाहते हैं। तो " स्वयं का मंथन " करें। अपनी विशेषताओं को ढूंढे। अपनी क्षमताओं को पहचाने। जैसे समुद्र में कई अमूल्य वस्तु छिपी हुई थी। परंतु समुद्र मंथन के द्वारा ही वह बाहर निकल सकी। फिर देर किस बात की करिए अपने मन का मंथन और निकालिए अपनी छुपी हुई प्रतिभा को बाहर। अपनी खूबियों को पहचानिए।
पर कुछ लोगो का focus अपनी खूबियों पर नहीं अपनी कमियों पर होता हैं। अपनी कई शारीरिक कमियों की लिस्ट थमा देते हैं। कहते हैं। हम तो मोटे हैं, नाटे हैं। अंधे हैं। लंगड़े हैं। लुले हैं। अब तो उम्र हो चुकी हैं, आदि। या फिर अपनी परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराते हैं। कि हम तो गरीब हैं। अशिक्षित हैं। छोटी जात के हैं, आदि। यदि आप भी ऐसी किसी कमी को अपनी सफलता की राह में बाधा मानते हैं। तो मैं आपको बता दूं। कि यह कमिया कभी भी आपको सफल होने से नहीं रोक सकती। यदि आपको कोई सफल होने से रोक सकता है तो वो सिर्फ और सिर्फ आप हो। और आपकी स्वयं के प्रति नकारात्मक सोच।
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| Success mantra |
आपके जीवन की कोई कमी आपको सफल होने से नहीं रोक सकती। यह तो सिर्फ आप कुछ नहीं करना चाहते। उसका बहाना मात्र हैं। और अपनी नाकामी को इन कमियों की चादर उड़ाना चाहते हैं। यकीन नहीं। तो गूगल पर सर्च करके देखिए। ऐसे हजारों लाखों लोग मिल जाएंगे। जिन्होंने अपनी इन कमियों के बावजूद सफलता हासिल की। और आज अपनी फील्ड में वे अच्छे मुकाम पर हैं।
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| Success mantra |
जिस तरह कोयले की खान में हीरा मौजूद रहता है। उसे ढूंढ कर निकालना पड़ता है। ठीक उसी तरह अपनी इन कमियों के बीच अपनी खूबियों को भी ढूंढ कर निकालिए। एकांत में शांत चित्त होकर बैठिए और अपने अंदर झांकिए। और पूछिए खुद से ऐसा कौन सा कार्य है? जो आपको अच्छा लगता है? जिस कार्य को दिन के 18 घंटे लगातार करने के बाद भी आपका मन ना थकता हो। भले ही आपका शरीर थक चुका हो। ऐसा कौन सा कार्य है? जिसे करने पर आपको खुशी महसूस होती हो? और जब आपको जवाब मिल जाए। तो उसी कार्य से संबंधित फील्ड में जाएं। परंतु इतना करने मात्र से आप सफल नहीं होने वाले। क्योंकि कोयले की खान में से आपने हीरा तो ढूंढ निकाला। परंतु यदि आप उसे तराशोंगे नहीं। तो वह अपना सही मूल्य नहीं पा सकता। ठीक उसी प्रकार जैसे आपको अपनी प्रतिभा तो मिल गई। परंतु आप उसमें निपुड़ता हासिल नहीं करोगे तो उसकी कीमत कम आंकी जाएगी। और आप कभी भी सफलता के उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाओगे। जहां तक आपको पहुंचना चाहिए। और यदि आपको सफलता का वह मुकाम पाना है। तो आपको अपनी प्रतिभा को तराशना होगा।
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| Success mantra |
अपने कार्यों को निखारना होगा। और अपने उस कार्य को बेहतरीन बनाने के लिए उससे संबंधित हमेशा कुछ ना कुछ नया सीखते रहना होगा। खुद को और अपने कार्य को हमेशा अपडेट करते रहना होगा। ताकि आप सफलता की रेस में बने रहे। पिछड़े नहीं। और यहां मंथन जीवन पर्यंत चलते रहना चाहिए।
जैसे-
दूध उपयोगी है। किंतु एक ही दिन के लिए फिर वह खराब हो जाता है।
दूध में एक बूंद छाछ डालने पर वह दही बन जाता है। जो केवल 2 दिन और टिकता है।
दही का मंथन करने पर वह मक्खन बन जाता है। वह और अधिक दिन टिकता है।
मक्खन को उबालकर घी बनता है। यहां कभी नहीं खराब होता।
एक ही दिन में खराब होने वाले दूध में कभी नहीं खराब होने वाला घी छुपा हुआ है।
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ठीक उसी तरह आप में भी अपार क्षमताएं छुपी हुई है। आपका मन भी अपार शक्तियों से भरा है। उसमें कुछ सकारात्मक विचार डालिए। अपने मन को मथिए। चिंतन करिए। अपने को संघर्ष की आग में तपाइए और तब देखना आप कभी ना हार मानने वाले सदाबहार व्यक्ति बन जाओगे।
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