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गुरुवार, 15 जुलाई 2021

सफलता का मूलमंत्र - निरंतरता success mantra

प्रस्तावना -  सफलता के मूलमंत्र की इस कड़ी में आज हम बात कर रहे हैं। कि किस तरह हम अपने कार्यों की निरंतरता को बनाए रख कर अपने लक्ष्यों को जल्द पूरा कर सकते हैं। 



जी हां यदि आप सफल होना चाहते हैं। तो आपको अपने लक्ष्य को पाने के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहना होगा।



आप सभी ने कछुए और खरगोश की कहानी तो सुनी ही होगी। जिसमें कछुए की जीत इसलिए हुई थी। कि वह भले ही धीरे चला परंतु जब तक वह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचा तब तक वह रुका नहीं। निरंतर चलता रहा और खरगोश की हार इसलिए हुई थी। कि वह रेस की शुरुआत में तो बहुत जोश में तेज दौड़ा परंतु आधी रेस में ही उसका वह जोश ठंडा हो गया। और वह यह सोच कर कि अभी तो बहुत समय हैं। थोड़ा आराम कर लेता हूं। और वह एक पेड़ के नीचे सो गया। अक्सर लोग यही गलती करते हैं। कोई लक्ष्य बनाते हैं। शुरु शुरु में तो बहुत जोश में अपने लक्ष्य की और आगे बढ़ते हैं। और कुछ दिनों बाद ही उनका वह जोश ठंडा हो जाता है। जिसके चलते वह अपने प्रयासों को बीच में ही छोड़ देते हैं।
























उदाहरण स्वरूप मान लीजिए आपने 10 किलो वजन कम करने का लक्ष्य बनाया। शुरू शुरू के 4 दिन तो आप बहुत जोश में जिम जाते हो। और पांचवें दिन में आपका वह जोश ठंडा हो जाता है। फिर आप 4 दिन की छुट्टी मना लेते हो। सोचते हो अभी तो बहुत टाइम है। कर लेंगे फिर याद आता है। कि वजन कम करना है। फिर 4 दिन जिम जाते हो 4 दिन की छुट्टी बनाते हैं। और ऐसा करने से आपके कार्य की निरंतरता टूट जाती है। जिसके चलते आप कभी भी लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। अब दूसरा उदाहरण ले लीजिए आपने 99% लाने का लक्ष्य बनाया। जिसके चलते आपको रोज 6 से 7 घंटे पढ़ाई करनी है। और आप शुरू के चार छ: दिन तो बड़े जोश में पढ़ाई करते हैं। फिर आपका वह जोश ठंडा हो जाता है। फिर सोचते हैं। अभी तो पूरा साल पड़ा है। आराम से पढ़ लेंगे। फिर 4 दिन पर पढेंगें।और 4 दिन नहीं पढेंगे। ऐसा करने से आपके लक्ष्य के प्रति आप की निरंतरता टूट गई। जिसके चलते आप अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते और वह लोग बाजी मार जाते हैं। जो हमसे पीछे थे। परंतु अपनी निरंतरता के चलते हम से आगे निकल गए। निरंतरता का यह फार्मूला हर लक्ष्य के पीछे काम करता है। ये तो सिर्फ दो उदाहरण थे। कुछ लोग आलस्य के चलते तो कुछ लोग अपने लक्ष्य में आ रही बाधाओं के चलते अपने प्रयासों को आधे में ही छोड़ देते हैं। जिस कारण लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते।

























सफलता पाना है। तो निरंतर प्रयास करते रहिए यदि आपको अपना लक्ष्य पाना है। तो आपको दृढ़ संकल्प लेना होगा। कि आपके सामने कितनी भी बाधाएं आएं। कितनी भी परेशानियां आएं। आपको कोशिश करना नहीं छोड़ना है। लक्ष्य के प्रति अपनी निरंतरता को किसी भी कीमत पर टूटने नहीं देना है। चाहे आप कितनी भी बार असफल क्यो ना हो जाए। परंतु पीछे मिली असफलताओं के डर से अपने लक्ष्य को पाने के लिए किए जाने वाले आपके प्रयास रुकना नहीं चाहिए।
























क्योंकि मैदान में हारा व्यक्ति तो फिर भी जीत सकता है। परंतु मन से हारा व्यक्ति कभी नहीं जीत सकता। एक गाना है शायद आपने सुना हो। "रुक जाना नहीं कहीं तू हार के कांटों पर चलकर मिलेंगे साए बाहर के।"



आपने हरिवंश राय बच्चन की यह कविता तो पढ़ीं या सुनी होगी। "लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती। कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।" अगर नहीं पढ़ीं। तो जरूर पढ़िए। इस कविता की एक-एक लाइन लोगों के मन में उत्साह भर देती है।


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