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गुरुवार, 8 जुलाई 2021

सफलता का मूलमंत्र- असफलता को सहज़ लेना

प्रस्तावना - सफलता के मूलमंत्र कि इस कड़ी में आज हम बात कर रहे हैं। कि 

किस तरह हम असफलता को सहज स्वीकार कर अवसाद से बच सकते हैं। और किस तरह अपनी असफलता को भी सफलता में बदल सकते हैं।


अब आप सोच रहे होंगे कि सफलता के मूल मंत्र में असफलता कहां से आ गई। तो मैं आपको बता दूं। आपको हर बार सफलता हाथ नहीं लगती। जिंदगी में कई मौके ऐसे आते हैं। जब आप को हार का मुंह भी देखना पड़ सकता है। क्योंकि कुछ चीजें हमारे हाथ में नहीं होती।




सफलता का मूलमंत्र










हम तो पूरी कोशिश करते हैं। अपने लक्ष्य को पाने की पर जरूरी नहीं परिस्थितियां हमारे अनुकूल ही हो। कई बार परिस्थितियां हमारे विपरीत भी हो जाती है। और हमारी कोशिशों के बावजूद भी हमें हार का सामना करना पड़ जाता है। जब ऐसा होता है। तो बहुत से लोग उस असफलता से टूट कर बिखर जाते हैं। और डिप्रेशन में चले जाते हैं। और कई बार निराशा के चलते आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं। क्योंकि उनका मन तो सफलता के बड़े-बड़े सपने देख रहा था। वह तो इस हार के लिए तैयार ही नहीं था। यह क्या हो गया इतनी मेहनत पर पानी फिर गया और डिप्रेशन में आ गए।








सफलता या असफलता हमारे हाथ में नहीं है। हमारे हाथ में कोशिश करना है। हम खुद को सफलता या असफलता दोनों के लिए तैयार रखें और असफलता को भी उसी सहजता से स्वीकार करें जैसे सफलता को करते हैं। तो खुद को डिप्रेशन में जाने से बचा सकते हैं।


जैसे किसी खेल के सारे खिलाड़ी अपना बेस्ट देते हैं। उसके बाद भी कई बार टीम को हार का मुंह देखना पड़ता है। पर वह उस हार को सहज ही स्वीकार कर लेते हैं। क्योंकि वह जानते हैं। हार और जीत दोनों ही खेल का हिस्सा है। एक टीम जीतेगी तो दूसरी हारेगी।



उसी तरह यह जिंदगी भी खेल का मैदान है। जिसमें हम सब अपना रोल प्ले करने आए हैं। जहां कुछ मौके पर हम चौके मारते हैं। तो कई बार out भी हो जाते हैं। सफलता और असफलता दोनों ही जिंदगी का हिस्सा है। और आपको उनको सहज ही स्वीकार करना आना चाहिए।







"यदि जिन्दगी में वह मुकाम नहीं मिला जो आप चाहते थे। तो निराश मत होइए इसका सीधा सीधा मतलब यह है। कि आप के नसीब में वह है। जो उससे बेहतर है। जो आप चाहते थे।"


बस अपने प्रयास जारी रखें। किसी भी कंडीशन में हार नहीं माने। किसी भी लक्ष्य को पाने की शुरुआत इसी संकल्प के साथ करें। कि मेरे हाथ में सिर्फ कोशिश करना है। और मैं अपना 100%  दूंगा।


चाहें सफलता हाथ लगे या असफलता मैं दोनों को सहज ही स्वीकार करूंगा। असफलता से निराश होकर हार मानने वालों में से मैं नहीं हूं। ना ही मैं किसी समस्या के आगे घुटने टेकने वालों में से हूं। मैं समस्याओं के हल निकालना जानता हूं। मैं सफलता को हासिल करने की कोशिश करता रहूंगा। 


यह संकल्प आपको टूटने नहीं देगा। और एक ना एक दिन आप अपने लक्ष्य तक जरूर पहुंचेंगे। यकीन रखिए खुद पर किया गया यह विश्वास ही आप को सफल बना सकता है। और आत्महत्या जैसे कदम उठाने से रोक सकता है।


कई बार असफलता का मुंह देखने के बाद जो सफलता हाथ लगती हैं। वो सफलता एक दिन बहुत बड़ा इतिहास रचती हैं।


YouTube video - असफलता को सहज लेना। Click here


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