प्रस्तावना - दोस्तों सफलता के मूलमंत्र कि इस कड़ी में आज हम बात कर रहे हैं। कि किस तरह हम सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाकर सफलता को आसानी से हासिल कर सकते हैं। और किस तरह हम अपनी सकारात्मक दृष्टिकोण से कुछ बड़ा achieve कर सकते।
सकारात्मक दृष्टिकोण =
जिंदगी के प्रति आपका नजरिया कैसा है? यह तय करता है। कि आप अपनी जिंदगी में कितना सफल होंगे। यदि आपका दृष्टिकोण हर वस्तु और परिस्थिति को लेकर सकारात्मक है। तो आपकी सफलता के chances कई गुना बढ़ जाते हैं। और यदि आपका दृष्टिकोण नकारात्मक है। तो बहुत हद तक यह आपकी सफलता को प्रभावित कर सकता है। मैं यहां पर एक छोटी-सी कहानी आपके साथ शेयर कर रही हूं। जिसके जरिए आप इस बात को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
एक महान लेखक अपने लेखन कक्ष में बैठा हुआ कुछ लिख रहा था।
(1) पिछले साल मेरा ऑपरेशन हुआ। और मेरा गाल ब्लाडर निकाल दिया गया। इस ऑपरेशन के कारण बहुत लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा।
(2) इसी साल में 60 वर्ष का हुआ। और मेरी पसंदीदा नौकरी चली गई। जब मैंने उस प्रकाशन संस्था को छोड़ा तब 30 साल हो गए थे। मुझे उस कंपनी में काम करते हुए।
(3) इसी साल मुझे अपने पिता की मृत्यु का दुख भी झेलना पड़ा।
(4) इसी साल मेरा बेटे का कार एक्सीडेंट हो जाने के कारण मेडिकल की परीक्षा में फेल हो गया। क्योंकि उसे बहुत दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। कार की टूट-फूट का नुकसान अलग हुआ।
अंत में लेखक ने लिखा।
वह बहुत ही बुरा साल था।
जब लेखक की पत्नी लेखन कछ में आई तो उसने देखा। कि उसका पति बहुत दुखी लग रहा है। और अपने ही विचारों में खोया हुआ है। अपने पति की कुर्सी के पीछे खड़े होकर उसने देखा। और पढ़ा कि वह क्या लिख रहा था? वह चुपचाप कक्ष से बाहर गई। और थोड़ी देर बाद एक कागज के साथ वापस लौटी। और वह कागज उसने अपने पति के लिखे हुए कागज के बगल में रख दिया। लेखक ने उस कागज को देखा उस पर कुछ लिखा है। उसने पढ़ना शुरू किया।
(1-a) पिछले साल आखिर मुझे उस गाल ब्लैडर से छुटकारा मिल गया। जिसके कारण में कई सालों से दर्द से परेशान था।
(2-a) इसी साल में 60 वर्ष का होकर स्वस्थ दुरुस्त अपनी प्रकाशन कंपनी की नौकरी से सेवानिवृत्त हुआ। अब मैं पूरा ध्यान लगाकर शांति के साथ अपने समय का उपयोग और बढ़िया लिखने के लिए कर पाऊंगा। और अपने व अपने परिवार के लिए भी आसानी से समय निकाल पाऊंगा।
(3-a) इसी साल मेरे 85 वर्ष के पिता बगैर किसी पर आश्रित हुए और बिना गंभीर बीमार हुए परमात्मा के पास चले गए।
(4-a) इसी साल भगवान ने एक्सीडेंट में मेरे बेटे की रक्षा की कार टूट फूट गई। लेकिन मेरे बच्चे की जिंदगी बच गई। उसे नई जिंदगी मिली और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
अंत में उसकी पत्नी ने लिखा
इस साल भगवान की हम पर बहुत कृपा रही साल अच्छा बीता।
इस कहानी के माध्यम से यह सीख मिलती है। कि मानव जीवन में प्रत्येक मनुष्य के समक्ष अनेक परिस्थितियां आती है। उन परिस्थितियों का प्रभाव क्या और कितना पड़ेगा? यह पूरी तरह हमारे सोचने के तरीके पर निर्भर करता है। परिस्थितियां वही रहती है। पर नजरिया बदलने से पूरा परिणाम बदल जाता है। हर चीज को दोष देते रहेंगे और शिकायत करते रहेंगे। तो हमेशा दुखी रहेंगे और दुखी मन आपकी कार्य की क्षमता, आपकी एकाग्रता आदि ऐसी बहुत सी चीजों पर बुरा प्रभाव डालेगा। जो आपके लक्ष्य को पाने के लिए बेहद आवश्यक है। जिस कारण आपकी सफलता भी बाधित हो सकती है। वही आपका सकारात्मक दृष्टिकोण आपको हर परिस्थिति में सम रखेगा। और आपके मनोबल को गिरने नहीं देगा।
एक अंधा आदमी मंदिर गया तो लोग उसकी हंसी उड़ाने लगे। कि मंदिर में आकर क्या कर रहा है? भगवान के दर्शन तो तू कर नहीं सकता। इस बात पर वह अंधा आदमी बोला। क्या फर्क पड़ता है? कि मैं भगवान को नहीं देख सकता। मेरा भगवान तो मुझे देख सकता है ना।
हर चीज के दो पहलु है। एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक। यह आपको तय करना है। कि नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर आपको हमेशा दुखी होकर रोते रहना है। या सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर अपने जीवन को और भी बेहतर बनाने का प्रयास करते रहना है।
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