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गुरुवार, 30 सितंबर 2021

खुश रहना सीखों।

प्रस्तावना - "खुश रहना सीखों।" इस लेख में मैने यह बताया है। कि किस तरह हम अपने जीवन में सुख, समृद्धि, प्यार और सम्मान को attrect कर सकते हैं।



हरे कृष्णा दोस्तों,



दोस्तों यदि आप अपने जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं। और अपने जीवन में सुख समृद्धि प्यार और सम्मान पाना चाहते हैं। तो आपको कुछ बदलाव करना पड़ेंगे और यह बदलाव दूसरों में नहीं बल्कि आपको खुद के भीतर करना है। जब आप खुद में बदलाव लाते हैं। तो आपके जीवन में भी धीरे-धीरे बदलाव आने लगता है। आपको हर चीज की शुरुआत खुद से ही करना है। यदि आप चाहते हैं। कि लोगों से आपको मान सम्मान मिले। प्रेम मिले। तो पहले आप खुद से प्रेम करें। खुद का आत्मसम्मान करें। इसके अलावा जिस मान सम्मान की जिस प्रेम कि आप दूसरों से अपेक्षा रखते हैं। पहले वह स्वयं दूसरों को देना सीखें। क्योंकि जो भी हम दूसरों को बांटते हैं। वही हमारे पास लौटकर आता है। जिस व्यक्ति को दिया। भले हीं वहां से लौटकर ना आए। पर कहीं ना कहीं से आपके पास वापस जरूर आता है। प्रेम बाटोंगे तो प्रेम ही लौटकर आयेगा। नफरत बाटोंगे तो नफरत ही आपके पास लौटकर आयेगी। 




क्योंकि यही प्रकृति का नियम है। जब पहाड़ पर खड़े होकर जोर से चिल्लाते हैं। I Love you तो कई बार पलटकर कर आता है I 



I Love you , I Love you , I Love you.



उसी तरह यदि हम चिल्लाते हैं। I hate you तो वह भी पलटकर आता है। 



I hate you , I hate you , I hate you.



कहने का तात्पर्य यह है। कि हम जो भी देते हैं। वह हमारे पास जरूर वापस आता है। और बल्कि कई गुना होकर हमें वापस मिलता है। क्योंकि यही प्रकृति का नियम है। हम जो भी प्रकृति को देंगे। वह हमें कई गुना करके लौटाएगी।



अक्सर हम दूसरों में कमियां निकालते हैं। और उन्हें सुधारना चाहते हैं। उन्हें बदलना चाहते हैं। पर दुनिया को बदलना एक असंभव सा कार्य है। और स्वयं को बदलना संभव है। दूसरों की कमियां निकालने की अपेक्षा अपने गिरेबान में झांके और देखें। कि हमारे अंदर क्या-क्या कमियां हैं। और उन कमियों को सुधारने का प्रयास करें। ताकि हमारा व्यक्तित्व और अधिक निखरकर आए। दूसरों को सुधारने में अपनी एनर्जी और समय बर्बाद ना करें। यह एनर्जी और समय खुद की तरक्की पर लगाएं।



क्योंकि यदि कच्चा रास्ता है। और उस पर कांटे बिछे हैं। तो रास्ते पर से एक एक कांटा निकालने का काम असंभव सा है। उसकी अपेक्षा अपने पैरों में चप्पल पहनना अधिक आसान है। ठीक उसी तरह दुनिया को बदलने का काम असंभव सा है। उसकी अपेक्षा खुद को बदलना अधिक आसान है।



जब हम खुद पर काम करते हैं। अपनी कमियों को सुधारते हैं। अपने व्यवहार को सुधारते हैं। अपने नजरिए को सुधारते हैं। जब अपने मन की स्थिति को सुधारते हैं। तो परिस्थिति अपने आप सुधर जाती है। 













यदि आप अपनी जिंदगी में खुशियां चाहते हैं। तो हर हाल में खुश रहना सीखें। क्योंकि हम मनुष्य एक चुंबक की तरह है। हम खुद को जिस एनर्जी में रखते हैं। वही एनर्जी हमारी ओर खिंची चली आती है। यदि हम जीवन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण  रखते हैं। और हमेशा शिकवे शिकायते करते हैं। हमेशा उदास रहते हैं। रोते रहते हैं। दुखी रहते हैं। तो हम अपने जीवन में दुख को ही आकर्षित करते हैं।



इसके विपरीत यदि हम अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं। और हर परिस्थिति में खुश रहते हैं। तो अपने जीवन में खुशी को ही आकर्षित करते हैं।



आपने यह कहावत तो सुनी होगी कि "मुसीबत आती है। तो चारों तरफ से आती है।" 



कभी सोचा है। ऐसा क्यों होता है? क्योंकि जब हमारे जीवन में दुख आता है। तो हम हमेशा दुख वाली एनर्जी में ही रहते हैं। और इस एनर्जी में रहने के कारण हमारे पास और अधिक दुख खिंचा चला आता है।



जब किसी की तरक्की पे तरक्की को होते देखते हैं। तो एक कहावत कहते है। कि उसकी तो "दसों उंगलियां घी में और सर कढ़ाई में है।"



जब जीवन में खुशियां आती है। तो हम खुशी वाली एनर्जी में ही रहते हैं। इस कारण हमारे जीवन में और अधिक खुशियां खिंची चली आती है। और हमारी तरक्की पर तरक्की होने लगती है।



जीवन में खुशियां आने पर खुश रहना आसान है। परंतु दुख आने पर खुश रहना थोड़ा मुश्किल है। परंतु दुख आने पर भी खुद को खुश रखना हमें सीखना पड़ेगा। ताकि हमारे जीवन में और अधिक दुख ना खींचा चला आए खुशियां ही आए।



खुद को सुख दुख में बैलेंस रखना भी एक कला है। बस हमें परिस्थितियों के प्रति अपने नजरिए को सकारात्मक करने की जरूरत है।



एक संत महात्मा थे उनका एक भक्त उनको भेंट स्वरूप एक गाय दान करता है। महात्मा के चेले बहुत खुश हो जाते हैं गुरु जी हमें गाय मिली है दान में। गुरु जी कहते हैं अच्छी बात है। दूध दही मिलेगा। कुछ समय बाद बीमारी के कारण उस गाय की मृत्यु हो जाती है। चेले दुखी होकर कहते हैं गुरुजी गाय तो मर गई। गुरु जी कहते हैं। कोई बात नहीं गोबर उठाने की समस्या से छुटकारा मिला।



















सुख दुख मैं खुद को बैलेंस रखना ही जीवन जीने की कला है। अच्छे वक्त में गुरूर ना होना और बुरे वक्त में नाउम्मीद ना होना। यह एक अव्वल दर्जे के इंसान की ही निशानी है। 



सुख दुख जीवन का हिस्सा है। उसे सहज स्वीकार कीजिए। सुख-दुख हमारी chois नहीं। परंतु खुश रहना और दुखी रहना ये हमारी chois है। तो हमें दुःख आने पर खुश रहना है या दुःखी रहना है। यह हमें तय करना है।



राधे - राधे।



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धन्यवाद्।


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