प्रस्तावना - " संघर्ष से ही तो इंसान महान बनता है।" यह कविता विकट परिस्थितियों में भी इंसान को धैर्य बनाए रखनेे की प्रेेरणा देती हैं। और उसके जीवन में फैले गम केे अंधियारे के बीच उसकेेेे निराश मन में उम्मीद की किरण जगाने का कार्य करती है।
कविता (poetry) - " संघर्ष से ही तो इंसान महान बनता है।"
मत घबराना आज की विकट परिस्थितियों से,
"संघर्ष से ही तो इंसान महान बनता है।।"
पड़ती है कई चोंटे हथोड़े की,
तब जाकर पत्थर भगवान बनता है।।
प्रकृति भी हमें सिखलाती है,कीचड़ में कमल और
कांटो के बीच ही गुलाब खिलता है।।
बंदे तू क्यों टूटकर बिखरता है।
आग में तप कर ही तो सोना निखरता है।।
रात कितनी भी गहरी काली हो, कभी सुना है?
अंधेरे ने सुबह ही ना होने दी हो।।
सपनों को साकार करने के लिए ही तो,
उम्मीदों का सूरज उगता है।।
ईश्वर में यदि तेरी आस्था है।
तो यकीन मान उलझनों में भी रास्ता है।।
भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं।
वह जब देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है।।
Related post - जो होता है अच्छे के लिए होता है।
दोस्तों मैंने अपने शब्दों के जरिए पूरी कोशिश की है। कि आप हर परिस्थिति में सकारात्मक बने रहे। और उम्मीदों का दामन कभी ना छोड़े। और यदि आप किसी परेशानी में है। तो भगवान पर पूरा भरोसा रखें। " उसके हर विधान में मंगल छुपा हुआ है।" इस बात पर विश्वास कर अपना धैर्य बनाए रखें और सकारात्मक सोचे और अच्छे कार्य करते हुए अपने जीवन में आगे बढ़ते रहे। यकीन मानिए एक दिन आपका मंगल अवश्य होगा।
दोस्तों यदि आपको "संघर्ष से ही तो इंसान महान बनता है।" मेरी यह कविता अच्छी लगी। तो आप इसे आगे भी शेयर करें। दोस्तों मेरे काम को सरहाने के लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया। आशा करती हूं। आपका और हमारा यह स्नेह पूर्ण संबन्ध सदा बना रहेगा। नीचे दी गई red line पर touch करके आप मुझे youtube और facebook page पर भी follow कर सकते हैं।
धन्यवाद ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
If you have any problam please let me know.